ब्रह्मचर्य का महिमा गान और आज के समय में चारित्रिक दुर्गति के विभिन्न कारण

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ब्रह्मचर्य का महिमा गान और आज के समय में चारित्रिक दुर्गति के विभिन्न कारण :-

  1. भगवान बुद्ध – ‘‘भोग और रोग साथी है और ब्रह्मचर्य आरोग्य का मूल है।’’

  2. गुरुगोविन्द सिंह – ‘‘इंद्रिय संयम करो, ब्रह्मचर्य पालो, इससे तुम बलवान और वीर्यवान बनोगे।’’

  3. आयुर्वेदाचार्य वाग्भट्ट – ‘‘संसार में जितना सुख है वह आयु के अधीन है और आयु ब्रह्मचर्य के अधीन है।’’

  4. छांदोग्योपनिषद् – ‘‘एक तरफ चारों वेदों का उपदेश और दूसरी तरफ ब्रह्मचर्य, यदि दोनों की तौला जाए तो ब्रह्मचर्य का पलड़ा वेदों के उपदेश से पलड़े के बराबर रहता है।’’

  5. भीष्मपितामह – ‘‘तीनों लोक के साम्राज्य का त्याग करना, स्वर्ग का अधिकार छोड़ देना, इससे भी कोई उत्तम वस्तु हो, उसको भी छोड़ देना परन्तु ब्रह्मचर्य को भंग न करना।’’

  6. स्वामी रामतीर्थ – ‘‘जैसे दीपक का तेल-बत्ती के द्वारा ऊपर चढक़र प्रकाश के रूप में परिणित होता है, वैसे ही ब्रह्मचारी के अन्दर का वीर्य सुषुम्रा नाड़ी द्वारा प्राण बनकर ऊपर चढ़ता हुआ ज्ञान-दीप्ति में परिणित हो जाता है।’’

  7. जीव शास्त्री डॉ० क्राउन एम.डी . – ‘‘ब्रह्मचारी यह नहीं जानता कि व्याधिग्रस्त दिन कैसा होता है। उसकी पाचन शक्ति सदा नियमित रहती है। उसकी वृद्धावस्था में बाल्यावस्था जैसा ही आनन्द रहता है।’’

  8. प्रो० रौवसन – ‘‘ब्रह्मचारी की बुद्धि कुशाग्र और विशद होती है, उसकी वाणी मोहक होती है, उसकी स्मरण शक्ति तीव्र होती है, उसका स्वभाव आनन्दी और उत्साही होता है।’’

  9. स्वामी विद्यानन्द – ‘‘ब्रह्मचर्य से परोपकार की वृत्ति जागृत होती है और परोपकार की वृत्ति के बिना किसी को मोक्ष मिलना सम्भव नहीं है।’’

  10. आचार्य विनोबा भावे – ‘‘मैं नहीं कहता कि ब्रह्मचर्य आसान चीज है। हाँ विशाल कल्पना मन में रखोगे तो आसान हो जाएगा। ऊँचा आदर्श सामने रखना और उसके लिए संयमी जीवन का आचरण करना, इसको मैं ब्रह्मचर्य कहता हूँ।’’

  11. महात्मा गाँधी – ‘‘अनेक लोग कहते हैं और मैं मानता हूँ कि मुझमें बड़ा उत्साह है। मैं अपनी यह हालत लगभग 20 वर्ष तक विषय भोग में लिप्त रहने के बाद प्रारम्भ किए गए ब्रह्मचर्य से हासिल कर सका हूँ। यदि इन 20 वर्षों को भी बचा सका होता तो आज मेरे उत्साह का पार ही न रहता।’’

आज के समय में चारित्रिक दुर्गति के विभिन्न कारण :-

1. टी.वी. व सिनेमा की सत्यानाशी हवा।

2. अश्लील साहित्य और चित्र।

3. वर्तमान शिक्षा पद्धति व शिक्षण संस्थानों का वातावरण।

4. कुसंगति।

5. मोबाईल कम्पनियों द्वारा ……।

6. परिवार में पारिवारिक व आत्मीय वातावरण का अभाव।

7. इन्टरनेट का दुरुपयोग।

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