भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम 1951 से  2003 तक | 

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Last Updated on November 27, 2022 by kumar Dayanand

Table of Contents

भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम 1951 से  2003 तक | 

1- संविधान संशोधन 1951

इसमें विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर तीन कारणों से प्रतिबंध लगाया गया
a- सार्वजनिक हित के मुद्दे पर आदेश
b- विदेशी राज्यों से संबंध
c- अपराध भड़काना संबंधी मामले में

7- संविधान संशोधन 1956

इसमें राज्यों के चार वर्गों को एबीसीडी समाप्त किया एवं 14 राज्य व 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए

दो या दो से अधिक राज्यों के लिए सामूहिक न्यायालय की व्यवस्था की गई

8- संविधान संशोधन 1960

इसमें एससी एसटी के आरक्षण को 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया

10- संविधान संशोधन 1961

इसमें दादर एवं नगर हवेली को भारतीय संघ में शामिल किया गया

12- संविधान संशोधन 1961

इसमें गोवा और दमनदीप को भारत संघ में शामिल किया गया

14- विधान संशोधन 1962

-इसमें पांडिचेरी को भारतीय संघ में शामिल किया गया

– लोकसभा में सीटों की संख्या 500 से बढ़ाकर 525 कर दी गई

– हिमाचल प्रदेश मणिपुर त्रिपुरा और पांडिचेरी में विधानमंडल की बात की गई

15- संविधान संशोधन 1963

इसमें हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 कर दी गई

22- विधान संसोधन 1969

इसमें असम से एक नए राज्य मेघालय का गठन हुआ

23- संविधान संशोधन 1970

-एससी एसटी का आरक्षण उन्हें 10 वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया

24- संविधान संशोधन 1971

-संसद को अधिकार दिया गया कि वह संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है परंतु मूल ढांचे में नहीं

– संविधान संशोधन को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति बाध्य होंगे

31- संविधान संशोधन

इसमें लोकसभा की सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गई

35- संविधान संशोधन 1975

इसमें सिक्किम भारत संघ का सहयोगी राज्य बना

36- विधान संशोधन 197*

इसमें सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया

41- संविधान संशोधन 1976

इसमें राज्य लोक सेवा आयोग एवं संयुक्त लोक सेवा आयोग में सदस्यों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 कर दी गई

42- संविधान संशोधन 1976( इंदिरा गांधी सरकार में)

इस संविधान संशोधन को लघु संविधान भी कहा जाता है इसमें संविधान की उद्देशिका में 3 नए विचार जोड़े गए

a- समाजवादी
b- प्रभु संपन्नता
c- अखंडता

– संविधान के भाग 4 में खंड A जोड़ा गया जिसमें मूल कर्तव्य संविधान में सम्मिलित किए गए

– इसमें कहा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह मानने के लिए बाध्यकारी होंगे

-DPSP मैं तीन नए तत्व जोड़े गए

a- समान न्याय अर्थात निशुल्क कानूनी सहायता
b- औद्योगिक प्रबंध में श्रमिकों की भागीदारी
c- पर्यावरण एवं वन्य जीवो की रक्षा

* राज्य में कानून व्यवस्था के लिए केंद सैन्य Bal भेज सकता है

44- संविधान संशोधन 1978 (मोरारजी देसाई की सरकार में)

– राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिमंडल की सलाह को एक बार पुनः विचार के लिए वापस भेजा जा सकता है

– राष्ट्रीय आपदा में आंतरिक अशांति के स्थान पर सशस्त्र विद्रोह जोड़ा गया

– संपत्ति के अधिकार को मौलिक श्रेणी से हटाकर इसे संसद के अधिकृत कर दिया गया और 300(A) के तहत रख दिया

45- संविधान संशोधन 1990

इसमें एसटी एससी के आरक्षण को 10 वर्ष के लिए पुनः बढ़ा दिया गय

52- संविधान संशोधन 1985

संशोधन में दल बदल कानून बनाया गया

61- समविधान संशोधन 1989

इसमें लोकसभा एवं विधानसभा में मतदान की उम्र को 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया

62- संविधान संशोधन 1989

इसमें एससी एसटी के आरक्षण को पुनः 10 वर्ष के लिए बढ़ाया गया

69- संविधान संशोधन 1991

– इसमें केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया तथा 70 सदस्य विधानसभा बनाई गई तथा 7 सदस्य मंत्री परिषद

70- संविधान संशोधन 1991

राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में दिल्ली एवं पांडुचेरी विधानसभा के सदस्यों को शामिल किया गया

71- संविधान संसोधन..1992

इसमें अनुसूची 8 में कौकड़ी नेपाली और मणिपुरी भाषा जोड़ी गई

73- संविधान संशोधन 1992

इसमें पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया

11वीं अनुसूची जोड़ी गई तथा 29 विषय दिए गए जिन पर पंचायतें अमल करेंगी

74- संविधान संशोधन 1993

इसमें 12 शहरी विकास संस्थाएं जोड़ी गई

शहरी निकायों द्वारा कार्य किया जाए

79- संविधान संशोधन 2000

एससी एसटी का आरक्षण 10 वर्ष के लिए पुनः बढ़ाया गया 2010 तक

84- समविधान संशोधन 2002

लोकसभा विधानसभा में सीटों की संख्या 2026 तक यथावत बनी रहेगी

86- संशोधन 2002

-प्राथमिक शिक्षा को मूल अधिकार बना दिया गया अनुच्छेद 21a में जोड़ा गया तथा 6 से 14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की गई

– कर्तव्य में जोड़ा गया कि अभिभावकों का दायित्व है कि वह अपने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दें

87 संविधान संशोधन 2003

निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर निर्धारण की बात की गई तथा यह कहा गया कि इसका आधार 2001 की जनसंख्या होगी

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