राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन, ध्यानचंद और द्रोणाचार्य पुरस्कार 2021

(i) राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार : इसे 1991-92 में आरंभ किया गया | इसके तहत नगद पुरस्कार 7.5 लाख रुपए दिया जाता है | या किसी वर्ष में किसी उत्कृष्ट खिलाड़ी को खेलों में उसकी उपलब्धि पर सम्मान करने के लिए प्रदान किया जाता है, यह पुरस्कार सर्वप्रथम विश्वनाथन आनंद को प्रदान किया गया था |

राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन, ध्यानचंद और द्रोणाचार्य पुरस्कार 2021
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन, ध्यानचंद और द्रोणाचार्य पुरस्कार 2021

(ii)  मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी : यह ट्रॉफी 1956-57 में शुरू की गई | यह चल बेजती रोलिंग ट्रॉफी है और यह अंतर विश्वविद्यालय टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को प्रदान की जाती है, इसे फिर से हासिल करने वाले विश्वविद्यालय को ट्रॉफी की प्रतिकृति भी दी जाती है, इसके अलावा विश्वविद्यालय को ₹1000000 का नकद पुरस्कार दिया जाता है, प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले विश्वविद्यालय को ₹500000 तथा तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले को ₹300000 के नगद पुरस्कार दिए जाते हैं |

(iii) ध्यानचंद पुरस्कार :  इससे वर्ष 2002 में गठित किया गया, इसमें नगद पुरस्कार ₹500000 है | पुरस्कार उन खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए प्रदान किए जाते हैं, जिन्होंने अपने खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और सक्रिय खेल जीवन से संन्यास लेने के बावजूद भी खेल की उन्नति के लिए योगदान करते रहते हैं | प्रत्येक वर्ष ज्यादा से ज्यादा 3 खिलाड़ियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है |

(iv) अर्जुन पुरस्कार : इससे 1961 में प्रारंभ किया गया और इसमें ₹500000 का नगद पुरस्कार दिया जाता है | खिलाड़ी को न केवल उत्कृष्टता के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले 3 वर्षों में और उस वर्ष में जिसमें पुरस्कार की सिफारिश की गई है, लगातार अच्छा प्रदर्शन किया जाना चाहिए | एवं नेतृत्व, खेल भावना और अनुशासन का भाव दर्शाया होना चाहिए | 2001 से यह पुरस्कार केवल उन विभागों में दिया जाएगा, जो निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं|

 जैसे:  ओलंपिक खेल \ एशियाई खेल / राष्ट्रमंडल खेल / विश्व कप / विश्व चैंपियन विभाग / स्वदेशी खेल / शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों के लिए खेल |

 नोट:  प्रत्येक वर्ष अधिकतम 15 अर्जुन पुरस्कार दिए जाते हैं |

(v)  द्रोणाचार्य पुरस्कार : इसे 1985 में आरंभ किया गया | इसमें उन विख्यात कोचों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने खिलाड़ियों और टीमों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने में समर्थ बनाया है | इसमें ₹500000 का नगद पुरस्कार और गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा प्रदान की जाती है 

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