रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्ट-अप की बात करते हुए

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Last Updated on July 13, 2022 by kumar Dayanand

महामारी के बीच स्टार्ट-अप का यूनिकार्न एक अरब डालर से अधिक बनना देश के युवाओं की बड़ी उपलब्धि

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पिछले रविवार अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्ट-अप की बात करते हुए भारत को इस क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी बताया। महामारी के बीच भी हर दस दिन में एक स्टार्ट-अप का यूनिकार्न देश के युवाओं की बड़ी उपलब्धि है।

अरुण श्रीवास्तव। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम (रविवार 28 नवंबर को) में देश में तेजी से आगे आ रहे स्टार्ट-अप का प्रमुखता से उल्लेख करना अकारण नहीं है। उन्होंने खासतौर पर इनका जिक्र करते हुए इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले दस महीनों में भारत में हर दस दिन में कोई न कोई स्टार्ट-अप यूनिकार्न (एक अरब डालर से अधिक मूल्य वाली कंपनी) बन रहा है। यह बड़ी बात है। उल्लेखनीय यह भी है कि भारतीय युवाओं ने यह उपलब्ध ऐसे समय में हासिल की है, जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था कोरोना के कारण लड़खड़ाई हुई है।

सबसे सुखद बात यह है कि ये स्टार्ट-अप सिर्फ कारोबार करने और मुनाफा कमाने के लिए सामने आए हैं, बल्कि इसके पीछे इनके संस्थापक युवाओं के वैश्विक और सामाजिक सरोकार भी हैं। देखा जाए, तो ज्यादातर स्टार्ट-अप को शुरू करने के पीछे उनके संस्थापकों द्वारा खुद समस्याओं से होकर गुजरना रहा है, जिसने उन्हें उन समस्याओं को दूर करने के उपाय सुझाने के लिए प्रेरित किया। उत्साही युवाओं ने समस्याओं को ही अवसर मानकर कुछ ही समय में बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया। लोगों की मुश्किलें कम करने में मददगार होने के कारण ही ये कारोबार तेजी से आगे बढ़ सके।

बेरोजगारी का विकल्प : आमतौर पर भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश के लिए बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा रही है। लोकसभा या विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दल इसे जोरशोर से मुद्दा भी बनाते रहे हैं। यह अलग बात है कि चुनाव के बाद शायद ही कोई इसे लेकर बहुत गंभीर होता है या फिर किसी ठोस योजना के तहत कदम उठाता है। दरअसल, ज्यादातर लोगों को आज भी सरकारी नौकरियों की ही चाह होती है। यही कारण है कि केंद्र या राज्य के स्तर पर रिक्तियां आने की स्थिति में उपलब्ध पदों की तुलना में हजारों-लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं। सीमित पद होने के कारण ज्यादातर युवा बेरोजगार ही रह जाते हैं।

इस तरह से साल दर साल यह संख्या बढ़ती चली जाती है। जाहिर है कि सीमित पद और संसाधन होने के कारण हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए यह विषय आसानी से मुद्दा बना लिया जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रधानमंत्री ने युवाओं जिस तरह नौकरी के पीछे भागने के बजाय नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित करना शुरू किया है, उससे काफी हद तक तस्वीर बदलने लगी है। यही कारण है कि युवाओं में अपने इनोवेशन के बल पर नौकरी के बजाय स्टार्ट-अप शुरू करने की इच्छा बलवती हुई है। उन्होंने अपने संकल्प से अपने साथ-साथ अन्य युवाओं को भी स्वावलंबी बनाने की राह सफलतापूर्वक चुनी है।

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