Hindi Poem – हिंदी कविता – काश मेरी फिर वही पुरानी रात आ जाए, वो

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Last Updated on November 27, 2022 by kumar Dayanand

Hindi Poem – हिंदी कविता – 

काश मेरी फिर वही पुरानी, रात आ जाए
वो मोहब्बत वाली लबों पे, बात आ जाए

अब तो हम ,खुदको भी नहीं पहचान पाते
तुम कोशिश करो, तो कुछ याद आ जाए

अक्सर, घुटनों पर गिर जाती है मोहब्बत
जो इश्क़ के बीच में अगर, जात आ जाए

मोहब्बत साथ में थी, तो सर झुका लिया
अकेले में हो जिसकी औकात, आ जाए

यारो उस वक्त उठाना, तुम मेरा ज़नाज़ा
जब उसके दरवाज़े पर, बारात आ जाए

उसकी अदालत में, कोई तो मेरे जैसा हो
हो कर कोई बे गुनाह, गिरफ़्तार आ जाए

CHAIRMAN & MANAGING DIRECTOR

एसी क़ातिल है, उसके आंखों की चमक
वो जो पत्थर को पढ़ें, तो दरार आ जाए

बुलाया है हमे, खत्म रिश्ता करने ले लिए
हम दुआ कर रहे है, हमे बुखार आ जाए

अपना सर भी, शोक से झुका लेंगे दीपक
सामने उसका घर या कोई मज़ार आ जाए

ये किस तरह का ताल्लुक है आपका मेरे साथ
मुझे ही छोड़ के जाने का मशवरा मेरे साथ

यही कहीं हमें रस्तों ने बद्दुआ दी थी
मगर मैं भुल गया और कौन था मेरे साथ

वो झांकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है
तुझे यकीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ

By: Dayanand Sir Alias Deepak Sir

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