Kahani बेटी का जन्म Moral Kahaniya Hindi Stories | Hindi Bedtime Moral Kahani | Fairytale IN Hindi.

Kahani बेटी का जन्म Moral Kahaniya Hindi Stories | Hindi Bedtime Moral Kahani | FairyTale In Hindi.

मधु अपने मां पापा का लाभ लेते हुए हमेशा अपने पापा की मदद किया करते थे यह लीजिए पापा मैंने कुर्ते का बटन टांग दिए हैं बहुत अच्छे बेटा अब तुम्हें सिलाई करना भी सीख लेना चाहिए क्या पता ससुराल में काम आ जाए क्या पापा अगर मेरी शादी के बाद कर बैठे हैं मैं तो ऐसे पास रहना चाहते हो हां हां लाडली हम अपने पापा के पास ही रहो धीरे-धीरे मनु के पापा ने उसे सिलाई करना सिखा दिया मधु को सिलाई करना बहुत पसंद था मधु अपने पापा की दुकान में काम  किया करते थे वही दीपक मधु को देखा और उसे हुआ भाग गई दीपक  ने उसके पिता जी से बात की कुछ दिन बाद दीपक और मधु की शादी हो गई दीपक नौकरी करता था

इसीलिए शुरू शुरू में सब ठीक था 2 साल बाद मधु ने एक बेटी को जन्म दिया देखिए जी कितनी प्यारी है आंखें देखिए अब क्या देखो तुमने मुझे कुछ देखने लायक छोड़ा है क्या मेरे घरवाले सब वारिस का इंतजार कर रहे हैं अब किस मुंह से उन्हें बताओ कि तुमने एक लड़की को पैदा किया है लड़का हो या लड़की है तो हमारी ही ना मैं लड़की से तुम्हारी है मेरी नहीं दीपक वहां पर चला गया और मधु रोने लगे कुछ देर बाद मधु के पापा कहां है मधु जी हुई सब कुछ बताया तो फिकर मत कर मैं दामाद जी से बात कर लूंगा सब ठीक हो जाएगा इस लड़के को अपनाएंगे क्या क्यों नहीं अपनाएंगे  आखिर उसका अपना खून है

मधु के पिताजी उसे दिलासा देने लगे फिर ओ  दीपक से मिलने उसके घर गय बेटा दीपक तुम तो इतने समझदार हो बल्कि यह बेटी होना तो एक तो ऊपर वाले की मर्जी है इसमें हम क्या कर सकते हैं हो सकता है कि तुम्हें अगली बार बैठा हूं दीपक ने मधु के पिता के बात मान ले और वह दोनों ही अस्पताल गया दीपक मधु को घर ले आया पर वह खुश नहीं था अरे मधु इस लड़की का शोर सुनकर कान के पर्दे फट गए हैं मेरे मेरी मां उसको चुप करवाओदीपक को अपने बेटे एक आंख नहीं भाती थी


जैसे तैसे कुछ महीने बीत गए और मधु एक बार फिर गर्भवती हुई इस बार और लड़का नहीं होना तो तुम्हें तुम्हारे पापा के घर भेज दूंगा समझे मधु को अस्पताल में एडमिट किया गया और उन लोग बाहर इंतजार करने लगा मुबारक हो आप को लड़की हुई है लड़की के नाम सुनते ही दीपक का मुंह लटक गया और वहां से चला गया आपके पति ऐसे चले क्यों गए क्या वह कहां गए मधुबाला को रोकने उठी रही थी कि तभी उसके पिता वहां गए/ पापा गुस्से में चले गए फिर बेटी  हुए है अब क्या कर सकते हैं मधु जो विधि है वह होगी ही मधु अपने पापा के गले लग कर रोने लगे मधु के पापा एक बार  फिर दीपक से मिलने गए इस बार मुझे कुछ सुनना नहीं है

आप चुपचाप आपके बेटे और उसकी बेटियों को हमारे सामने जाइए पर वह बच्चियां तुम्हारी भी है उन लड़कियों से मेरा कोई वास्ता नहीं है यह सुनकर मधु के पापा उदास हो कर वहां से चले गए मधु और उसको दोनों बेटियां को अपने घर ले गए मधु के पापा के उम्र हो गई थी फिर भी हो सिलाई का काम नहीं छोड़े ताकि मधु और उसकी बेटियों को अच्छे से पढ़ सके लेकिन दो साल बाद मधु के पापा चल बसे अब मधु के पास कोई सहारा नहीं था भदोही अपने आप को संभाला और सिलाई का काम करने लग गई वह अपनी दोनों बेटियों को संभालते संभालते सिलाई का काम भी करते थे

देखते-देखते इसके दोनों बेटियां बड़ी हो गई और वो स्कूल जाने लगी बड़ी बेटी माया स्पोर्ट्स में बहुत अच्छे थे मैं आपके परिस्थिति जानता हूं मैं लेकिन मैं चाहता हूं कि आप माया को सपोर्ट कीजिए और टैलेंटेड है और बहुत जल्द आपका नाम रोशन कर दिखाएंगे सर जितना मुझसे हो सकता है उतना मैं करूंगी पीटी  सर ने माया कि कोचिंग जारी रखें मधु भी अपने काम को ओवर टाइम करने लगे ताकि वह माया को सेहतमंद खाना और उसकी स्पोर्ट्स की जरूरत मान चीजें दिलवा सके/

माया भाई जी तोड़ मेहनत कर रही थी इन दोनों मां बेटियों की रंग लाई  नया न्यू स्टेट लेवल चैंपियन में गोल्ड मेडल जीत लिया माया ने अपनी मां का नाम रोशन कर दिया जब उसकी और उसकी मां की तस्वीर अखबार में आई यह तस्वीर देख कर दीपक सोच में पड़ गया कि आज उसका भी नाम इस अखबार में होता अगर वह बेटी के जन्म पर अपनी पत्नी को अकेल ना छोड़ देता उसकी इच्छा थी कि वह वापस जाकर माफी भी मांगे पर अब किस मुंह से बोलता/



Dayanand Kumar

Dayanand Kumar Board Of Directors:- Chairman & Managing Director, CEO & Whole Time Director, Whole Time Director, Audit Committee, Shareholders/ Investor Grievance Committee & Remuneration Committee ...

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