PM Live: मोदी ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भवन राष्ट्र को किया समर्पित

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Last Updated on September 30, 2022 by kumar Dayanand

PM Live: मोदी ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भवन राष्ट्र को किया समर्पित, कहा- ’21वीं शताब्दी में रक्षा क्षेत्र यूनिफॉर्म और डंडे तक सीमित नहीं’ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात में गांधीनगर के पास राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) का नवनिर्मित भवन राष्ट्र को समर्पित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान अपने कार्यक्रम को संबोधित भी किया। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा का क्षेत्र अब केवल यूनिफॉर्म और डंडे तक सीमित नहीं है। 21वीं शताब्दी की नई चुनौतियां हैं और हमें उसकी आवश्यकता के अनुरूप स्वयं को तैयार करना है।

‘रक्षा का क्षेत्र सिर्फ यूनिफॉर्म और डंडा नहीं’

पीएम मोदी ने कहा, राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी में आना मेरे लिए एक विशेष आनंद का अवसर है। यह यूनिवर्सिटी उनके लिए है जो देशभर में रक्षा के क्षेत्र में जो अपना करियर बनाना चाहते हैं। रक्षा का क्षेत्र सिर्फ यूनिफॉर्म और डंडा नहीं है, वह बहुत विस्तृत क्षेत्र है, उसमें वैल ट्रेंड मैनपावर ये समय की मांग है।

‘चुनौतियों के अनुकूल हमारी व्यवस्थाएं भी हो विकसित’

पीएम मोदी ने कहा, इसलिए रक्षा के क्षेत्र में 21वीं सदी की जो चुनौतियां हैं उन चुनौतियों के अनुकूल हमारी व्यवस्थाएं भी विकसित हो और उन व्यवस्थाओं को संभालने वाले व्यक्तित्व का भी विकास हो। अब उस संदर्भ में एक विजन को लेकर राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी का जन्म हुआ। प्रारंभ में वो गुजरात में रक्षा यूनिवर्सिटी के रूप में जानी जाती थी। बाद में भारत सरकार ने उसको एक पूरे देश के लिए एक अहम यूनिवर्सिटी के रूप में उसको मान्यता दी और आज ये एक प्रकार से देश का नजराना है, देश का गहना है। जो राष्ट्र की रक्षा के लिए यहां जो चिंतन मनन और शिक्षा ट्रेनिंग होगी वो राष्ट्र रक्षा के लिए आने वाले कालखंड में देश के अंदर एक नया विश्वास पैदा करेगी।

‘नमक सत्याग्रह के लिए इसी धरती से दांडी यात्रा की हुई थी शुरुआत’

पीएम मोदी ने कहा आज जो छात्र-छात्राएं यहां से पढ़कर निकल रहे हैं, उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को मेरी तरफ से मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। पीएम मोदी ने आगे कहा, आज एक और पावन अवसर है, आज के ही दिन नमक सत्याग्रह के लिए इसी धरती से दांडी यात्रा की शुरुआत हुई थी। अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ गांधी जी के नेतृत्व में जो आंदोलन चला, उसने अंग्रेजी हुकूमत को हम भारतीयों के सामूहिक सामर्थ्य का एहसास करा दिया था। पीएम मोदी ने कहा मैं दांडी यात्रा में शामिल हुई सभी सत्याग्रहियों का पुण्य स्मरण करता हूं।

‘सेना के लिए अवधारणा है कि सेना के लोग आ जाएं तो कोई परेशानी नहीं होती’

पीएम मोदी ने कहा, दुर्भाग्य से आजादी के बाद हमारे देश में कानून व्यवस्था के लिए जो काम होना चाहिए था, उसमें हम पीछे रह गए। आज भी पुलिस के संदर्भ में जो अवधारणा बनी है, वो ये है कि इनसे दूर रहो। वहीं सेना के लिए अवधारणा है कि सेना के लोग आ जाएं तो कोई परेशानी नहीं होती। आज भारत में ऐसी मैन पावर को सुरक्षा के क्षेत्र में लाना जरूरी है, जो सामान्य मानवी के मन में मित्रता की, विश्वास की अनुभूति कर सके।

‘स्ट्रेस फ्री एक्टिविटी की ट्रेनिंग आज सुरक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक’

पीएम मोदी ने लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंदर जनता-जनार्दन को सर्वोपरि मानते हुए, समाज में द्रोह करने वालों के साथ सख्त नीति और समाज के साथ नरम नीति, इस मूल मंत्र को लेकर हमें ऐसी ही व्यवस्था विकसित करनी होगी। स्ट्रेस फ्री एक्टिविटी की ट्रेनिंग आज सुरक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक हो गई है। इसके लिए ट्रेनर्स की आवश्यकता हो गई है। ऐसे में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी इस प्रकार के ट्रेनर भी तैयार कर सकती है।

‘गांधीनगर आज शिक्षा की दृष्टि से एक बहुत बड़ा वाइब्रेंट एरिया’

पीएम मोदी ने कहा, तकनीक एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर विशेषज्ञता नहीं है, तो हम समय पर जो करना चाहिए, वो नहीं कर पाते हैं। जिस प्रकार से साइबर सिक्योरिटी के मुद्दे सामने आते हैं, जिस प्रकार से क्राइम में तकनीक बढ़ती जा रही है, उसी प्रकार से क्राइम को कम करने में तकनीक बहुत मददगार भी हो रही है। गांधीनगर आज शिक्षा की दृष्टि से एक बहुत बड़ा वाइब्रेंट एरिया बनता जा रहा है। एक ही इलाके में कई सारी यूनिवर्सिटी और दो यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जो पूरे विश्व में पहली यूनिवर्सिटी है।

‘फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी पूरी दुनिया में कहीं पर नहीं’

उन्होंने आगे कहा, फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी पूरी दुनिया में कहीं पर नहीं है। पूरी दुनिया में कहीं पर भी चिल्ड्रेन यूनिवर्सिटी नहीं है।गांधीनगर और हिंदुस्तान अकेला ऐसा है जिसके पास से दो यूनिवर्सिटी है। रक्षा विश्वविद्यालय के माध्यम से हम उस प्रकार से लोगों को तैयार करना चाहते हैं, जो कम संसाधनों में भी चीजों को संभालने का सामर्थ्य रखें।

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