Today’s inspiration: यूँ तनहा बैठकर न देख हांथों की लकीरें, उठ

Today’s inspiration: यूँ तनहा बैठकर न देख हांथों की लकीरें 


दा खुश रहने का अर्थ यह नहीं है कि आपके जीवन में सब कुछ सही है… बल्कि यह है कि आप इतने शक्तिशाली बन चुके हैं कि बाहर की हलचल अब आपके मन को हिला नहीं पाती...

“यूँ तनहा बैठकर न देख हांथों की कीरें …
ठ, ङा हो और लिदे पनीकदीर !!”

नाव से केवल मस्याएं,

न्म ले कती है,

 माधान खोंजने है,

तो मुस्कुराना ही ड़ेगा |

 

समय के साथ रिश्तों का स्वाद भी बढ़ता है। रिश्तों की मिठास या ड़वाहट इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसमें हर रोक्या डालते हैं।

 

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